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Thursday, November 8, 2012

FIlm Director C.Parmanand : Satyajit Ray of Maithili Cinema !


हमहुं बनि सकैत छलहुं “मैथिली सिनेमाक सत्यजीत राय”- सी परमानन्द

"तीसरी कसम'में सी.परमानन्द जीक संग रामाश्रय चौधरी

फ़िल्म निर्देशक आ अभिनेता सी.परमानन्द जीके संग भेल बातचीतक किछु अंशश ः

मूल रुप सं दरभंगा जिलाके हायाघाट प्रखंड (सम्प्रति हनुमान नगर प्रखंड) के मोरो बिसनपुर निवासी सी. परमानन्द जीक नाम मैथिली फ़िल्मक इतिहासमें सदा ईयाद कयल जायत। मुदा कतेक विडम्बना अछि जे एहन महान मैथिल पुत्र जे मैथिलीक पहिल फ़िल्म ”ममता गाबय गीत”के निर्देशक छलैथ, आई अन्हारमें भुतलायल छैथ। हिनका पूछय बला केऊ नहिं ! सुधि लेनिहार केऊ नहिं ! सम्मानके नाम पर मौखिक सम्मान के अतिरिक्त हिनका किछु नहिं भेटलनि।  हंसिकए कहैत छैथ- “दिल को तसल्ली देने के लिए गालिब यह ख्याल अच्छा है

निर्देशक परमानन्द जी तत्कालीन बम्बईमें अपन पुरान जीनगीके ईयाद करैत कहैत छैथ जे ओ मुम्बई 1955 में गेल रहैथ। 1955-56 धरि संघर्ष केलथि। 1957में पहिल काज भेटल छल हुनका। करीब 17-18टा फ़िल्म में सहायक निर्देशकक भूमिका निभौने छलाह जाहिमें किछु फ़िल्मके नाम अछि- “साक्षी गोपाल”,”घर संसार”, ‘घर की लाज”, “ गूंज उठी शहनाई”, “अपसरा”, “घर घर दीप जले” आदि। “साक्षी गोपाल” में पहिल बेर काज केने छलैथ। “मां-बाप”में सहायक संवाद लेखक रहैथ। परमानन्द जी निर्देशनके अतिरिक्त अभिनय सेहो केने छलैथ। भारत भूषण , निरुपा राय , अनीता गुहा अभिनीत फ़िल्म “कवि कालीदास” तथा चर्चित फ़िल्म ‘तीसरी कसम”में हिनकर अभिनय हालाकि छोट छीन रहनि, मुदा नीक रहनि। राजकपूरक संग फ़िल्म “तीसरी कसम”में चाहक दोकान पर मैथिली सांवाद बाजिकए इतिहास बनेने छैथ। परमानन्द जी स्मरण करैत कहैत छैथ जे “एही सीन में हमरा संग हमर लंगोटिया यार रामाश्रय चौधरी छैथ जेकि हमर ग्रामीण छलैथ। सबसं पहिने रामाश्रय चौधरी हमरा फ़िल्म दुनियामें जयबाक लेल प्रेरित आर प्रोत्साहित केने छलैथ । नित दिन गाछी में हमरा फ़िल्म आर अभिनेता सबके बारे में सूचना दैत रहैत छलैथ आर एक्टिंग- अशीक कुमार के एहन रोल छै, त एहन डायलॉग छै ! हिनकर बियाह शुभंकरपुर, दरभंगामें भेल छल। हम हुनका सं बड्ड प्रभावित भेल छलहुं। आर अकरे प्रतिफ़ल जे हम मुम्बई चलि गेल रही 1955में। मुम्बई में करीब 6 माह धरि संघर्ष करय परल । फ़ेर  त  खूब काज भेटल ।“

बम्बई छोरय के पाछा कारण बताबैत कहलाह जे-“ हम बम्बई में लगभग स्थापित छलहुं। ओहि समयमें सत्यजीत रायक खूब नाम चलैत रहय। बंगाली सिनेमाक खूब लोकप्रिय रहै। हमरो मोनमें भेल जे हमहुं मैथिली सिनेमाके लेल किछु करी। हम बड्ड खुश भेलहुं जे हमरा पहिल मैथिली फ़िल्म ‘ममता गाबय गीत’क निर्देशन करयके सुअवसर प्राप्त भेल मुदा……. !!!  मैथिली प्रेम लेल मुम्बई छोड़ि देलहुं 1970-71में । मुदा “मैथिली फ़िल्मक सत्यजीत रॉय” बनयके सपना चूर चूर भ गेल। हम कुर्बान भ गेलहुं…..कुर्बान भेलहुं नहिं……कुर्बान करा देल गेल। मैथिल राजनीतिके शिकार बनि गेलहुंबलिके बकरा। हमरा सं एहि फ़िल्मके दौरान जे व्यक्ति जुड़लनि, हुनकर भाग्योदय भेलनि आर हमर भाग़्यास्त ! कमल नाथ सिंह ठाकुर एहि फ़िल्म में काज केने रहैथ।  हम सब अन्हारे में भुतलायत चलि गेलहुं। केऊ पूछय बला नहिं।"

मैथिलके प्रति अपन आक्रोश व्यक्त करैत कहय लगलाह जे- “मैथिल सबके लोटा में भरिकय पाइन द दीयौ, खूब पीत। मुदा इनार खोनके नाम पर सब भाइग जायत। सुबिधाभोगी होयत अछि मैथिल, कर्मयोगी नहिं। इनार खोना गेला पर सब दौड़के आवत अहाम्के पास पाइन पिबय लेल। खोब बड़ाइयो करत अहांके । परन्तु जहने पीयास हटि जेतनि, झट ओ पड़ा जेताह ओहि ठाम सं। एहन स्थित अछि अपना ठाम।“

“ममता गाबय गीत”क प्रीन्ट्क उपलब्धता के बारे में पूछलाह पर बतौलनि जे “ भ सकैत अछि अकर प्रिन्ट फ़िल्मक डिस्ट्रीब्यूटर भगत परिवार (गंगा भगत- दरभंगा टावर चौक)के पास होयत।“ पूछला पर परमानन्द जी स्पष्ट केलनि जे “फ़िल्म निर्देशक प्रह्लाद शर्मा मारवाड़ी स्कूलमें टीचर रहैत।“  जाले-कमतौल के निवासी शिवाजी राठौड़ के बारे में सेहो किछु बतौलनि। अन्त में कहलनि जे- “भास्कर जी। हमर नानी गाम खड़का बसंत ( जाले लग) अछि। हम बसंते बाटे खड़का जायत छलहुं।“ विदित जे एहि फ़िल्ममें खड़का ग्रामवासी आस नारायण मिश्रा जी सेहो काज केने छलैथ।  “ममता गाबय गीत” केर अभिनेता त्रिदीप कुमार के बारे में जनतव देलनि जे ओ एहि फ़िल्ममें अभिनय करय सं पूर्व किछु हिन्दी फ़िल्ममें सहायक निर्देशकक भूमिका निभौने छलैथ जेनाकि फ़िल्म ‘छोटी बहन”। हुनक असली नाम बी एन झा रहय। परमानन्द जी त्रिदीप कुमार जीक संगहि सांता क्रूज, मुम्बई में रहैत छलैथ।

परमानन्द जीक संग भेल एहि बातचीतके संभव बनाबयमें बसहा-माखनपुर निवासी अंजनी चौधरी जीक हम आभारी छी। संबंधमें परमानन्द जी अंजनी जीक पीतियौत नाना छथिन। 
रिपोर्ट- भास्कर झा

3 comments:

  1. ई मिथिलाक दुर्भाग्य छहि जे एहेन महान लोक सब के ओहेन उचित स्थान नहि भेटलनि जेहि केर ओ अधिकारी छलाह। आ आबो जंऽ यैह मानसिकता रहतहि मैथिल के त आरो गर्त मे चलि जेताह। सभ राजनीतिक पार्टी संऽ लात जुत्ता खाति रहताह। यैह लिखलाहा छनि।

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  3. मैथिली सिनेमाक लेल अपनेक भगीरथ प्रयास लेल सादर नमन सर🙏🙏

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