Friday, February 15, 2013

Premlata Mishra "Prem":A Veteran Artist & Motherly Figure On Maithili Theatre

विभिन्न सम्मान सं सम्मानित मैथिली रंगमंचक पहिल महिला रंगकर्मी एवं मैथिली, हिन्दी आ भोजपुरी फ़िल्ममें अभिनय केनिहार साहित्यानुरागी प्रेमलता मिश्र "प्रेम' सं लेल साक्षात्कार केर किछु अंश :

अपन प्रारंभिक जीनगीक संबंधमें किछु बताबी।
हमर नैहर रहिका अछि आ सीतामढी जिलाके अन्तर्गत धाधी-सिरसी हमर सासुर। हमर पढाई लिखाई गामें केर स्कूल में भेल। मैट्रिक फ़स्ट डिवीजन सं पास केने छलहुं। हमर पति रहिका स्कूल में शिक्षकके पद पर कार्य करैत छलैथ मुदा  “कक्का” (यात्री जी/नागार्जुन)के कहय पर पटना आबि गेलहुं। किछु दिन धरि हम कक्का के महेन्द्रु स्थित डेरा पर रहलहुं। चूंकि कक्का जीके जान पहिचान बड्ड पैघ पैघ लोक सं छलनि, त्यां दुआरे हमर पतिके नौकरी एकटा प्रकाशन में लागि गेल छल। चूंकि हमहुं नीक पढल छलहुं, त हमरो कहलैथ कि अहां कोनो स्कूल में शिक्षिका रुप में काज करु। से करय लगलहुं।

अहांक रंगंकर्मक यात्रा कोना प्रारंभ भेल ? अपन अनुभव बताबी
पटना अयला पर एक दिन कक्का जी (बाबा नागार्जुन-हमर पिता जीक पिसियौत भाय ) हमरा आकाशवाणी लय गेलाह आ कहलाह कि अहां आकाशवानी में विभिन्न गोष्ठी, संगोष्ठी, वार्ता, परिचर्चा आदि में भाग लिS, से हम  कार्यक्रम सबमें अपन सहभागिता देबय लगलहुं। हमरा एखनो स्पष्ट रुप सं मोन अछि। कक्का के हम आंगूर पकड़िकए आकाशवाणी गेल छलहुं। आ ओहि ठाम वार्ताके संग संग रेडियोमें नाटक सबमें भाग लेबय लगलहुं। आकाशवाणी में गोपेश जी, बटुक भाई, इन्द्रकान्त झा जेहन बरका बड़का रंगकर्मीक आबा-जाही बड होयत छल, हुनका सबके सम्पर्क में एलहुं। चेतना समिति सं जुरलहुं आ हुनके सबके साथ नाटक करैत करैत नाट्यमंच आ रंगकर्म सं जुड़ि गेलहुं। कम्पीयरिंग सेहो केलहुं। रंगकर्मीके सम्पर्क में अबितेहि चेतना समिति आदि बहुत रासे नाट्य संस्था सं जुड़ि गेलहुं। ई बात 1964-65 के अछि। तकरा बाद हमर रंगयात्रा चलिते गेल। एहि समयमें रंगमंचीय अभिनयक लेल नारी पात्रक अभाव छल। पुरुख सब नारीक भेषमें अभिनय करय छलाह। परिस्थिति एहन बनल जे हमरा एहि खगतके दूर करयमें रंगमंच पर आबय पड़ल। हमर प्रारंभिक  रंगमंचीय जीनगीमें टुटैत लोक”, “लेटायत आंचरआदि में हमर अभिनयक बड्ड प्रशंसा भेल ।टुटैत लोक में हम पहिल बेर अभिनय कयलहुं जेकि चेतना समिति द्वारा मंचित कयल गेल छल।

मैथिलीक पहिल फ़िल्म ममता गाबय गीतमें अहांक भूमिका सेहो अछि। ई भूमिका अहांके कोना भेटल  छल?

एहि सब नाटक करयक क्रममें  रबीन्द्रनाथ ठाकुरजी (रवीन्द्र-महेन्द्र)सं भेंट भेल छल जे हमरा सक्षम बुझैत हमरा कहलाह – “ अहां मुम्बई चलू। त हम हुनका सं पूछलियेन्कि ओतय हमरा की करय पड़त। त ठाकुर जी कहलैथ कि किछु नहिं , बस जे अहां अतय करैत छी मात्र सेईटा करय पड़त। ई बर्ख छल 1981-82क। 1981 सं सत्रह साल पहिने एकटा मैथिली फ़िल्म ममता गाबय गीत डिब्बामें बंद छल। रबीन्द्र जी एहि फ़िल्मके डिब्बा सं निकालिकए अकर पुनर्निर्माणक काज में लागल छलैथ। एहि फ़िल्ममें पहिलुका कथामें किछु आरो कथा जोड़ि देने छलैथ आ ओहिमें किछु पात्रक आवश्यकता छल। अजराक आवाजक डबिंगके संग संग हम नबका कथामें विधवा भाऊजक भूमिका केलहुं। ललितेश हमर पुत्रक भूमिका केलथि।

अहां मैथिली आर भोजपुरी फ़िल्ममें अभिनय केने छी। भोजपुरी फ़िल्ममें अभिनय करबाक अवसर कोना भेटल ?

प्रकाश झा एहि समयमें अपन फ़िल्म दामूलबना रहल छलैथ आ कास्टिंगके लेल समस्त रंगकर्मी के बजेने छलैथ । एहि ठाम  “दामूलक शूटिंग के दौरान हमरा कन्यादान फ़िल्ममें झारखंडी झाक भूमिका केनिहार जे गयाके छलैथ , सं भेंट भेल। ओ हमर अभिनय देखने छलैथ, त्यां ओ लक्ष्मण शाहाबादी के अपन संग लयकए विना बतौने हमरा डेरा पर चलि येलैथि। ओहि समयमें लक्ष्मण शाहाबादी एकटा भोजपुरी फ़िल्म दूल्हा गंगा पार के बना रहल छलैथि। एहि फ़िल्ममें हम मायक भूमिका केलहुं। तकरा बाद एकटा आरो भोजपुरी फ़िल्म बबुआ हमारमें काज केलहुं। फ़ेर मैथिली फ़िल्म ससता जिनगी महग सेनूरमें काज केलहुं । यद्यपि निर्देशक मुरलीधर हमर भूमिका बढाबय चाहैत छलैथ मुदा हमरा किछु असुविधा छल। डीडी पटनाके लेल प्रमोद चौधरी द्वारा निर्मित धारावाहिकपर्व भरा मिथिलामें काज केलहुं। शिव पूजन सहाय केर देहाती दुनियामें हमर अभिनय छल।  सुनील कुमार (रायपुर, सीतामढी)क भोजपुरी फ़िल्म माटीमें अभिनय केने छी । राजकमल चौधरीक कहानी पर आधारित श्रीकान्त मंडल जी द्वारा निर्देशित मैथिली फ़िल्म ललका पागक लेल हम पहिल बेर कॉन्ट्रैक्ट साइन केने रही मुदा दुर्भाग्यवश ई फ़िल्म रिकॉर्डिंग्के बादो नहिं बनि सकल। हिन्दी आर भोजपुरी फ़िल्म ओ सीरियल में काज करय के लेल कयकटा ऑफ़र आयल मुदा किछु परिवारिक कारणसं आ समयाभावक कारण हमरा ऑफ़र छोड़ि देबय परल।


अहां कोन कोन रंगमंच सब सं जुड़ल छी ?

महिला रंगकर्मीक रुपें हम बहुत रास संस्था सबसं जुड़लहुं जेना  भंगिमा, अरिपन, चेतना समिति, मैथिली महिला संघ आदि सं। आ एखनो एहि संस्था सं जुड़ले छी कोनो ने कोनो रुपे।

मैथिली रंगमंच पर मैथिलानीक उपस्थितिक खगताक विषयमें की कहय चाहब ?
नीक प्रश्न अछि। समीचीन प्रश्न । मुदा एहि संबंधमें हम ई कहय चाहब जे मैथिली रंगमंच पर मैथिलानीक उपस्थितिक स्थिति मोटा मोटी ठीके रहल अछि। हां, ई बात अवश्ये अछि जे मैथिलानी आब कैरियर ओरियेन्टेड भे गेलीह, परिवारिक काज-धाज में ओझरा गेलीह, अपन बच्चाके शिक्षा देबयमें बेसी सं बेसी समय देबय चाहैत छैथ, चाकरी करय बालीक ट्रांसफ़रक समस्या से अलगे। एहन परिस्थितिमें आब ओ नाटक केना करतीह ? नाटक में समर्पण चाही, समय चाही महिला रंगकर्मीमें बहुत रास महत्वपूर्ण नाम अछि । ककर ककर नाम कहू। स्वाती सिंह, प्रियंका, शारदा सिंह (मैथिल नहिं), आशा चौधरी, रितु कर्ण, कल्पना, ज्योति झा , कयकटा कलाकार। पहिने तनुजा शंकर अभिनय करै छलीह। आब छोड़ि देलीह।

अहांके कोन कोन सम्मान भेटल अछि ?
हमरा साहित्य, कला, संस्कृति, अभिनय लेल बहुत रास सम्मान भेटल अछि। पटनाक चेतना समित, कोलकाताक मिथिला सांस्कृतिक परिषद, दिल्लीक अखिल भारतीय संस्थान,, दरभंगाक विद्यापति सेवा संस्थान, दिल्लीक नाट्य संस्था  मैलोरंग द्वारा (ज्योतिरीश्वर सम्मान) हमरा सम्मानित कयल गेल अछि। । मैथिली संस्थाक तुलनामें हमरा हिन्दी संस्थासं बेसी सम्मान भेटल अछि। नूर फ़ातिमा सम्मान, पाटलिपुत्र अवार्ड, मिथिला विभूति दू दू बेर कोलकाता द्वारा , रहिका द्वारा सम्मान।

अहांक परिवारमें के के छैथ ?
हमर परिवार में 3टा पुत्र एकटा पुत्री। ज्येष्ठ मनमोहन मिश्रा (आईबी में), दोसर रवि रंजन मिश्रा (ILFS में वाइस प्रेसिडेंट), तेसर अनुपमा जे म्यूजिक में एमए कय रहली अहि । गीत गबैत छथि। छोटका बेटा सत्यजीत मिश्रा तबला बादक अछि।
अभिनयक सं संग अहां सुपरिचित साहित्यकार सेहो छी। अपन साहित्यिक रचना  सबके बारे में किछु बताबी ?
आकाशवाणि सं जुड़ला पर  एहिमें वार्ता प्रस्तुत करबाक लेल हमरा लिखय पड़ैत छल। बादमें विभूति आनन्द केर प्रेरणा पर हम  अपन लेखन कार्यके गति  प्रदान करय लगलहुं। विभिन्न पत्र पत्रिकाक सम्पादन केलहुं आर एखनो कय रहल छी। हमर रचना विभिन्न पत्र पत्रिका सभमें प्रकाशित भेल अछि। हमर  कथा संग्रह अछि- एगो छली सिनेह”,  हमर संस्मरण “वो दिन वो पल आओर कथा- संग्रह शेखर प्रसंग अछि जेकि हमर पीएचडी केर विषय छल। साहित्यिक गतिविधिमें सतत लागल रहैत छी। पटनामें अपन घर पर सब मासमें एक दिन “सांध्य गोष्ठी” केर आयोजन करैत छी जाहिमें मैथिली, हिन्दी रचना आदिक पाठ तथा ओकर  विश्लेषण होयत अछि।  एकटा रंगमंच विशेषांक जल्दिये आबय बला अछि।

अहां अतेक समय देलहुं, अहि लेल अहांके बहुत बहुत धन्यवाद।
अहुंके बहुत बहुत धन्यवाद भाष्कर जी।


2 comments:

  1. She was my house owner @ her Patna residence in the year 2001. I know her very well.

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  2. bahut neek, udaharn chait, aage margdarshan seho k rahal chait,

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