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Sunday, August 13, 2023

Shri Gopal: The First Bihari Actor Who acted as a Hero in Maithili, Bhojpuri & Magahi Films

 

 

श्री गोपाल: बिहार का पहला अभिनेता जिसे मैथिली,भोजपुरी और मगही तीनों भाषाओँ में नायक बनने का सौभाग्य मिला

 

गया कालेज का एक लड़का कालेज में नाटकों में अपने अभिनय के कारण बेहद लोकप्रिय था । उस समय पटना में इंटर कालेज का ड्रामा कम्पीटीशन होता था पटना युनिवेर्सिटी में इस कम्पीटीशन में जज बनकर मुंबई से आये थे इब्राहिम अल्काजी  उस लड़के का अभिनय देख उन्होंने कहा – तुम यहाँ क्या कर रहे हो? मुंबई आओउन्होंने कह  दिया पर 18 साल का वो लड़का  हीरो बनने का सपना देखने लगा लेकिन मुंबई कैसे जाये  तो दोस्तो ने टिकट कटाया और सूट सीलावाया और अपने दोस्त को १९६२ में गया से मुंबई भेजा नाम था – श्री गोपाल गया के चाँद चौरा के रहनेवाले श्री गोपाल उन बिहारी अभिनेताओं में से हैं जिन्हें बिहार की तीन भाषाओं में नायक बनने का सौभाग्य मिला मात्र दो साल के संघर्ष के बाद अपने जीवन के  20 वें साल में वो हीरो बन गए 

मुंबई आने पर वो प्रकाश स्टुडियो गए जहाँ उन्हें पता था कि बिहारी मुंशी जी का आफिस है जहानाबाद के मुंशी जी जो उस समय सिनेमा के बड़े  निर्माता थे उनके साथ काम करने के बारे में कहते है श्री गोपाल –

उनका आफिस था प्रकाश स्टुडियो में। मैं उनके यहाँ एकाउंट का काम करने लगा । उनके लिए  उस समय मुंशी जी के लिए फणी मजुमदार , अशोक कुमार और नलिनी जयवंत को लेकर फिल्म डायमंड हार्बर  बना रहे थे । तब तक मैंने किसी से नहीं कहा था कि मुझे अभिनेता बनना है । मैंने फणी दा से कहा कि मै निर्देशन सीखना चाहता हूँ । तो मैंने उन्हें अस्सिस्ट करना शुरू किया । उस समय एक जगह भोजपुरी सम्मेलन मनाने की बात हुई और समारोह में कार्यक्रम के लिए मुझसे संपर्क किया गया । मैंने वीर कुँवर सिंह को लेकर कुछ ड्रामा का सीन बनाया । उस समारोह की काफी पब्लिसिटी हुई थी । मुंबई में जगह - जगह उसके पोस्टर लगे थे । दिल्ली से भी कुछ बड़े मिनिस्टर लोगों को आना था । तब तक भोजपुरी फिल्म बननी शुरू हो चुके थी। उस समारोह को देखने के लिए हिन्दी सिनेमा के निर्देशक पंकज पराशर के पिता निर्माता जे एन पराशर आये थे। मेरा प्रोग्राम देखकर वो मुझसे मिले  और पेपर पर अपना नंबर लिख कर  मुझसे मिलने को कहा । मैं उनसे मिला और उन्होंने कहा कि तुम मेरी भोजपुरी फिल्म के हीरो बनोगे और इस तरह नइहर छुटल जाए का मुहूर्त शाट हुआ. स्टुडियो में सबको पता चल गया कि मै हीरो बनने जा रहा हूँ । और इस तरह बतौर हीरो भोजपुरी फिल्म से मेरी शुरुआत हुई।


मगही फिल्म भैया का निर्माण

नालंदा पिक्चर्स के मालिक मुंशी जी मगही भाषी थे तो उन्होंने अपनी भाषा में फिल्म बनाना चाहा । फणी मजुमदार निर्देशक हुए।मै तब तक भोजपुरी में हीरो बन चूका था और मगही मेरी भाषा थी तो मुझे फिल्म का नायक बनाया गया । विजया चौधरी मेरी हीरोइन थी। लता बोस ने मेरी बहन का किरदार निभाया । बिहार की कई  जगहों पर इसकी शूटिंग हुई। फिल्म खूब चली थी।

 

कन्यादान बनने के योजना

दरअसल हुआ यूँ कि रेणु जी का उपन्यास मैला आँचल हिन्दी साहित्य में लोकप्रिय हो चूका था। मुंशी जी उस पर फिल्म बनान चाह रहे थे। निर्देशक फणी मजुमदार से बात हुई और सहमति बनने पर नवेंदु घोष को पटकथा लिखने को कहा गया और मुझे हीरो के रूप में कास्ट किया गया। मेरा फोटो शूट हुआ । चूँकि उपन्यास का कैनवास बहुत बड़ा था इसलिए राइटिंग में अधिक समय देने की जरुरत थी । इसमें देरी हो रही थी तो रेणु जी ने मुंशी जी से कहा कि आपने भोजपुरी में फिल्म बनाई। मगही में फिल्म बनाई तो क्यों नहीं तब तक मैथिली में एक फिल्म बनायें ,बात जाँच गई मुंशी जी को और खोज शुरू हुई एक अच्छी कहानी की । पता चला कि हरिमोहन झा के दो उपन्यास कन्यादान और द्विरागमन बेहद लोकप्रिय है मिथिला समाज में और इस तरह निर्णय लिया गया कि इन दोनों उपन्यासों पर फिल्म बनाई जाए मैथिली में। नवेंदु घोष जी को पटकथा के लिए और फणी मजुमदार को निर्देशन का जिम्मा दिया गया । मै बिहार से था और नायक उस उपन्यास में हिन्दी बोलता है तो फणी दा ने मुझे हीरो का रोल दिया । भैया जी में जिन्होंने बहन का किरदार निभाया था उन्हें इस फिल्म में मेरे अपोजिट हीरोइन कास्ट किया गया ।

मिथिला में इसकी शूटिंग हुई और  कुछ शूटिंग मुम्बई में हुई । चंद्रनाथ मिश्र अमर जी संवाद सीखाने के लिए आये थे। शूटिंग चालु हुई। मिथिला में एक जगह हम लोग शूट कर हे थे तो एक महिला ने हम लोगों से कहा कि भोजन भ गेले? 'हा हो गया' । तो  उन्होंने कहा कि अगल दिन आप लोग मेरे यहाँ भोजन करेंगे। भाई साहब अगले दिन उन्होने हम सबको मरुआ रोटी खिलाया । सब ने खाया । अगले दिन मुझे और फणी द़ा को छोड़कर सबका पेट खराब!

मैथिली में संवाद बोलना

रामायण तिवारी लडकी के बाप बने थे । वो मैथिली में संवाद नहीं बोल पा रहे थे ।चाहकर भी सही तरह से उच्चारण नहीं कर पा रहे थे तो उन्होंने स्वयं इस किरदार को न करने का फैसला किया और उस तरह अमर जी हीरोइन के पिता का किरदार निभाया। मराठी अभिनेत्री दुलारी जी और हीरोइन की माँ जो बंगाली अभिनेत्री थी इन दोनों का संवाद अदायगी बहुत सही था। भाभी के किरदार में चाँद उस्मानी ने बहुत सही तरीके से मैथिली में संवाद बोला ।

कन्यादान  फिल्म रीलिज

पटना के वीणा सिनेमा में यह फिल्म रीलिज हुई । वीणा सिनेमा हाल के मालिक हीरा बाबू कन्यादान के फाइनेंसर थे। फिल्म को दर्शकों ने काफी सराहा । सी परमानन्द से मेरी काफी दोस्ती थी लेकिन ममता गाबय गीत के लिए उन्हें शुद्ध मैथिली में बोलनेवाला कलाकार चाहिए । इसलिए मैं उस फिल्म में काम नहीं कर पाया ।

मैला आँचल बना डाकदर बाबू  / मुझे हटाकर धर्मेन्द्र को लिया गया

इधर जब मैला आँचल बनाने की बात हुई तो इस बीच क्या हुआ कि मुंशी जी को पता चला कि जहानाबाद में उनकी कुछ जमीनों पर नक्सलियों ने कब्ज़ा कर लिया तो जमीन बचाने के लिए जहानाबाद चले गए । इधर फणी दा की फिल्में  असफल होने लगी ।उन्होंने मुझ से कहा कि अब तुम भोजपुरी फिल्म मत करो। मै तुमको और अपर्णा सेन को लेकर हिन्दी फिल्म बनाऊंगा। लेकिन फणी दा का यह सपना साकर नहीं हो पाया ।कई सालों बाद मुंशी जे औए और फिर से मैला आँचल को लेकर फिल्म बनाने को अग्रसर हुए। समय बदल चूका था । फणी दा थे नहीं तो पटकथा लेखक नवेंदु घोष को निर्देशन की जिम्मेदारी सौंपी गई और मेरे बदले धर्मेदं को हीरो के रूप में कास्ट किया गया । फिल्म की शूटिंग हुई ।लेकिन फिल्म एक फिक्शन न होकर डाक्यूमेंट्री बन गई ।नवेंदु जी ने इतना शूट किया था कि एडिट करना मुश्किल हो गया। इसलिए फिल्म नहीं बनी।

बाद में श्री गोपाल जी ने कई भोजपुरी फिल्मों में हीरो बने । लेकिन हिन्दी सिनेमा से सरोकार नहीं बन पाया । उसका कारण बताते हुए वो कहते हैं कि मै हीरो बन चुका था । छोटा रोल नहीं करना चाह रहा था । परीक्षित साहनी –विधा सिन्हा और मै –रीता भादूडी की जोड़ी बनी थी फिल्म होनहार में । लेकिन इससे पहले कि फिल्म रीलिज हो पाती परीक्षित और विधा जी की कई फिल्में नहीं चलीं जिसका खामियाजा हमारी फिल्म को भुगतना पड़ा । होनहार रीलिज नहीं हो पाई। मै उसे अपनी किस्मत मानता हूँ।

उपकार सिनेमा और बिहार सरकर /सिनेमा को लेकर बिहार सरकार का रवैया

उपकार सफल हो चुकी थी और सारे राज्यों ने उसे टैक्स फ्री कर दिया था। मुझे निर्माताओं ने कहा कि तुम बिहार जाओ और सरकार से बात करो कि उसे टैक्स फ्री किया जाए । मै पटना आया कुछ दिनों तक रुका । मेरे रहने –खाने का सारा इंतजाम किया निर्माताओं ने । दारोगा राय उस समय बिहार के मुख्यमंत्री थे । उनसे बात हुई ।वो मान गए । उनकी पत्नी ने कहा कि मै धरती कहे पुकार के फिल्म देखना चाहती हूँ वो भी अपने घर में। अब क्या किया जाए । तो मैंने उनके घर में ही फिल्म दिखाने के सारी व्यवस्था की । दारोगा राय जी ने कहा कि आप जाए ..आपको चिठ्ठी मिल जाएगी । मै खुश होकर लौटा । कुछ दिनों बाद चिठ्ठी आयी कि बिहार की वित्तीय व्यवस्था ठीक नहीं है इसलिए हम टैक्स फ्री नहीं कर पायेंगे । क्या कहुं मेरी बहुत बेइजती हुई ।सब जगह टैक्स फ्री हो गया था। पता नहीं बिहार को क्या हो गया था ? बिहार का सिनेमा के प्रति हमेशा एप्रोच नकारात्मक ही रहा । इसलिए अपने यहाँ अन्य राज्यों के मुकाबले सिनेमा का हाल अच्चा नहीं है ।

-जितेंद्रनाथ झा जीतू

 

 

 

 

 

 

 

 

 

  

Sunday, August 18, 2013

50 Years Of Maithili Cinema

                 मैथिली सिनेमा पचास वर्ष                                                      -   भास्कर झा 
सिनेमा मनोरंजनक एकटा प्रमुख साधन मानल जायत अछि। आजुक युगमें समाजक सशक्त माध्यम आ अभिव्यक्तिकरण अछि सिनेमा जाहिमें सामाजिक,आर्थिक, सांस्कृतिक विकासक कलात्मक अभिव्यक्ति स्पष्टरुपे परिलक्षित होयत अछि। सिनेमा आ संगीतक माध्यमें भाषा, साहित्यिक वैभव व सांस्कृतिक समृद्धिकें राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित कएल जा सकैत अछि। 

सर्वविदित अछि जे मिथिला साहित्यिक आ समृद्ध सांस्कृतिक परम्पराक केन्द्र रहल अछि। मुदा दुखक बात जे  सिनेमाक माध्यमसं एकर सम्यक प्रदर्शन एखन धरि नहिं भ सकल अछि। राष्ट्रीय मंच पर बंगाली, पंजाबी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम आदि सदृश्य मिथिला आ मैथिलक पहिचान आ छवि निर्माण करयमें अपेक्षित सफ़लता नहिं भेट सकल अछि। मिथिला आ मैथिलीक अस्मिता बढबैमें फ़िल्म, गीत, संगीत केर उल्लेखनीय योगदान आ भूमिकाकें अस्वीकारल नहिं जा सकैत अछि। कहबाक कोनो आवश्यकता नहिं जे मिथिला आ मैथिली साहित्यिक आओर सांस्कृतिक रुपें अत्यंत समृद्ध अछि। मुदा एहि उपेक्षित क्षेत्रमें व्याप्त आर्थिक विपन्नता, सामाजिक असमानता आदि मिथिलाक विकासक मार्गमें अवरोधक अछि। तकर बादो सजग मैथिल एहि चुनौतीकें स्वीकार करैत सामाजिक समस्या आ आर्थिक विपन्नतासं लड़बाक संग संग अपन सांस्कृतिक विरासत आओर साहित्यिक परम्पराकें सफ़लतापूर्वक संवर्धित आ अनुरक्षित करबाक यथेष्ट प्रयास कए रहल छैथ।

भारतीय सिनेमा 3 मई 2013 कें अपन 100 वर्ष पूरा कएलक। 1913में भारतक पहिल मूक फ़िल्म “ राजा हरिश्चन्द्र”सं प्रारंभ फ़िल्मी यात्राक शताब्दी पूर्ण भेलके उपल्क्ष्यमें देश- विदेशमें आनन्द महोतसव आ सम्मान समारोहक आयोजन कएल गेल। दोसर दिस, भोजपुरी सिनेमा जकर प्रारंभ मैथिली सिनेमाक संग संग भेल छल, अपन पचासम वर्ष पूरा कएल। भोजपुरिया समाजमें हर्षक वातावरण देखल जा सकैत अछि। बहुत रास पत्र-पत्रिकामें भोजपुरी सिनेमाक इतिहास आ उपलब्धि संबंधी लेख प्रकाशित कएल गेल अछि। बड्ड हर्षक बात जे मैथिली सिनेमा सेहो अपन पचासम वर्ष पूर्ण कए लेलक। स्मरणीय अछि जे मैथिलीक पहिल फ़िल्म “ ममता गाबय गीत”क मुहुर्त अगस्त 1962में हिन्दी साहित्य सम्मेलन, पटना केर सभागारमें सपन्न भेल छल। मैथिली सिनेमाक पचास वर्ष भेला पर दरभंगामें मार्च 2013में प्रथम मैथिली फ़िल्म फ़ेस्टिवलक आयोजन कएल गेल । एहि समारोहमें देश विदेशक माय्थिली सिनेप्रेमी, प्रतिनिधि, निर्माता, निर्देशक, अभिनेता, अभिनेत्री, गायक, गायिका सहित ख्यात प्राप्त रंगकर्मीक उपस्थिति आह्लादकारी साबित भेल। मैथिली सिनेमाक दशा – दिशा, उपलब्धि आदि पर संगोष्ठीक आयोजन कएल गेल। मैथिली सिनेमामें  विशेष अवदानके लेल योगदान देनिहार मैथिलपुत्र/पुत्रीकें सम्मानित कएल गेल।

मैथिली फ़िल्म त्रय

महंत मदनमोहन दास, उदयभानु सिंह आ केदारनाथ चौधरीक निर्माण आ सी परमानन्द केर निर्देशनमें  “ नैहर भेल मोर सासुर” नामसं प्रारंभ भेल फ़िल्म “ ममता गाबय गीत”कें अकर मुहुर्तक आधार पर मैथिलीक पहिल फ़िल्म मानल जायत अछि, त फ़णि मजुमदार निर्देशित ”कन्यादान”कें पहिल प्रदर्शित फ़िल्म।मुदा 1964में प्रकाशित वैदेही केर मार्च बला अंकमें ‘ नैहर भेल मोर सासुर”कें मैथिलीक तेसर फ़िल्म कहल गेल अछि। खैर, जे होय। 

भोजपुरीक पहिल फ़िल्म “ गंगा मैया तोहरे पियरी चढेबौ” आर “ ममता गाबय गीत”क निर्माण लगभग एकहि संग प्रारंभ भेल छल। “ गंगा मैया तोहरे पियरी चढेबौ” फ़रबरी 1963में पहिने रिलीज भs s बिहारक पहिल फ़िल्म होयबाक तगमा हड़पि लेलक, त दोसर दिस मैथिली सिनेमा पछुआयत चलि गेल। भोजपुरी सिनेमाक पदार्पण तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसादक मात्रृप्रेमक प्रतिफ़ल छल त मैथिली सिनेमाक आरंभ प्रथम प्रधानमंत्री पं जवाहरलाल नेहरु द्वारा 1961में मैथिलीकें अकादमीमें मान्यता प्रदान कयल जेबाक पछाति मैथिलक हृदयमें जनमल भाषाप्रेम आऒर हुनक स्वप्रोत्साहन आ स्वप्रेरणा। भोजपुरी भाषी अभिनेता, निर्माता, निर्देशक आदि केर सतत सहयोग आ संरक्षण पाबि भोजपुरी सिनेमा आगू बढैत चलि गेल त दोसर दिस मैथिली सिनेमा आपसी ईर्ष्या-द्वेष, वाद-विवाद, अहंवादी प्रवृतिक कारणे पछुआयत रहि गेल।
“ ममता गाबय गीत”कें अपन तीत इतिहास अछि। एकर निर्माणमें लगभग 19 वर्ष लागल ! प्रारंभिक किछु शूटिंगक बाद किछु कारण्वश फ़िल्म निर्मान ठमकि गेल छल। मुदा मैथिलीक रसिद्ध गीतकार रबीन्द्रनाथ ठाकुर (रबीन्द्र-महेन्द्र फ़ेम) आ तत्कालीन इन्कम टैक्स कमिश्नर श्री सीताराम झाक अथक रयास आ सराहनीय सहयोगसं फ़िल्मक पुनर्निर्माण कएल गेल। अन्तत: ई फ़िल्म 1981में रिलीज भेल । गर्वक बात छी जे एहि फ़िल्मक निर्माणमें सी परमानंद जीक अभिन्न मित्र प्रसिद्ध अभिनेता राजेन्द्र कुमारक डिम्पल स्टुडियो आ सुनील दत्तक अजन्ता स्टुडियोक अहम भूमिका छल।एहि फ़िल्मक माध्यमें गीता दत्त, सुमन कल्याणपुर, महेन्द्र कपूर आदि केर स्वरमें मैथिली 
गीत सुनबाक अवसर भेटल समस्त मैथिल लोकनिकें।

मैथिली साहित्यिक उत्कृष्टतासं प्रभावित होयत आ एकर महत्ताके बुझैत फ़णि मजुमदार “ कन्यादान” बनौला। प्रसिद्ध कथाकार हरिमोहन झाक उपन्यास “ कन्यादान” आ “द्विरागमन” पर आधारित एहि फ़िल्ममें प्रसिद्ध साहित्यकार चन्द्रनाथ मिश्र “ अमर’ जी सेहो महत्वपूर्ण भूमिका निभौने छलाह। मुदा ई फ़िल्म हिन्दी संवादक अधिकताक कारणे चलि नहिं सकल। मुदा 1964-65में रिलीज भ’ क’ मैथिलीक पहिल प्रदर्शित फ़िल्म होबयके रिकार्ड अपना नामे कए लेलक। दुलाल सेन आ विन्द्यवासिनी देवीक संगीत निर्देशनमें विद्यापतिक दुगोट गीत के स्वर देने छलीह चन्द्राणी मुखर्जी , उषा मंगेशकर आ कमोल बरोट। एहि फ़िल्ममें प्रसिद्ध गायक मन्नाडे सेहो गौने छलाह।

हिन्दी फ़िल्मक प्रसिद्ध निर्देशक, गीतकार, एवं निर्माता दरभंगा निवासी प्रह्लाद शर्माक प्रयाससं हुनक निर्देशनमें “ जय बाबा बैद्यनाथ” (1972-79) बनल। आचार्य सोमदेव, अमर जी सेहो एहि फ़िल्ममें गीत लिखने छलाह। दुर्भाग्यवश इहो फ़िल्म चलि नहिं सकल। मुदा  प्रह्लाद शार्मा जीक प्रयास प्रेरक रहल।
एहि प्रकारे हम देख सकैत छी जे उपरोक्त फ़िल्म त्र के कारणे मैथिली फ़िल्मक लेल समुचित आ अपेक्षित वातावरण निर्माण संभव भ गेल।

मैथिली फ़िल्मक दोसर चरण प्रारंभ होयत अछि बहुचर्चित फ़िल्म “ सस्ता जिनगी महग सेनुर” (1999) सं । मिथिलाक मूल समस्या दहेज प्रथा पर आधारित ई फ़िल्म मैथिली सिनेमाक इतिहासमें मीलक पाथर साबित भेल। एहि अवधिमें भोजपुरी फ़िल्मक गतिविधि ठमकल छल, मुदा “ सस्ता जिनगी महग सेनुर” अपार सफ़लतासं प्रभावित होयत भोजपुरी सिनेमा फ़ेरसं दौड़य लागल मुदा नंग धरंग (अश्लीलता) आ मैथिली सिनेमा अपन संस्कारक पाग पहिरने फ़ेरसं ठमकि गेल। 2000सं 2004 धरि कोनो मैथिली फ़िल्म व्यवसायिक दृष्टिसं सफ़ल नहिं साबित भेल। मुदा तईयो एहि फ़िल्म, गीत संगीतक प्रभावकें नकारल नहिं जा सकैत अछि। “ आऊ पिया हमर नगरी”(2000), “ममता”, “सपना भेल सुहाग” (2001),” सेनुरक लाज” (2004) सब फ़्लॉप भ गेल। मुदा आऊ पिया हमर नगरी आ सेनुरक लाज दर्शकक मोन में आइयो अछि। 2005में प्रदर्शित “ कखन हरब दुख मोर” केर गीत संगीतक लोकप्रियता मैथिली सिनेमाक पियासल कंठमें सुखद जल साबित भेल। एहि समय प्रदर्शित” दुलरुआ बाबू” दर्शकक दुलार नहिं पाबि सकल। 2006में प्रदर्शित मनोज झा निर्देशित “ गरीबक बेटी” गरीबे रहि गेल। मुदा पिताक हृदयमें किछु आह्लाद द गेल। गोपाल पाठक “ अहां छी हमरा लेल” किनकरो नहिं भ सकल। 2008में ‘ सिन्दुरदान”के लेल दर्शक नहिं भेटल। 2010में ‘पिया संग प्रीत कोना हम करबै” नीक कथावस्तु,सुन्दर कथ्य,मधुर गीत संगीतक बादो दर्शककें अपन प्रीत नहिं देखा सकल।

2011में मुरलीधर निर्देशित “ सजना के अंगना में सोलह सिंगार”, युवा निर्देशक विकास झाक ‘ मुखिया जी” प्रदर्शित भेल। मुदा ई दुनु फ़िल्म किछु खास सिनेमा हॉले धरि सीमित रहि गेल। मुरलीधर अपन एहि फ़िल्ममें ओ जादू नहिं देखा सकला जेकि ओ अपन पहिल फ़िल्ममें देखौने छलैथ। दोसर दिस “ मुखिया जी” सेहो अपन मुखियागीरी देखाबयमें असफ़ल भ गेल। परंच, एहि फ़िल्मक माध्यमें एकटा होनहार, प्रभावी, दक्ष आ तकनीकी जानकारी रखनिहार युवा निर्देशक भेटल मैथिली सिनेमाके- विकास झाक रुपमें। फ़ेर, महेन्द्र चौधरीक “ साजन अहां बिना” त आयल, मुदा आबैत आबैत थाकि गेल। 2012के उतरार्द्धमें दु गोट महत्वपूर्ण फ़िल्म प्रदर्शित भेल- “ चट मंगनी पट्ट भेल बियाह” आ ‘ एक चुटकी सिन्दुर”। “ चट मंगनी…..” कम बजटक थोड़-बहुत नीक फ़िल्म छल- सुन्दर गी-संगीतसं सजल। फ़िल्म ठीक ठाक चलल। ओतहि “ एक चुटकी सिन्दुर” जेकि चीर प्रतीक्षित छल, मोन नहिं जीत सकल।

2012-2013 केर अवधि मैथिली सिनेमाक लेल महत्वपूर्ण समय साबित भ रहल अछि। कारण, एहि अवधिमें मैथिली सिनेमाक भविष्य उज्ज्वल करबाक हेतु नीक नीक शुभ संभावनाक जन्म भेल अछि। एहि समयमें लगभग दु दर्जन सं बेसी फ़िल्मक घोषणा भेल अछि। रिलीज भेला पर किछु फ़िल्म नीक चलि रहल अछि। मनोज झा निर्देशित “ खुरलुच्ची” सफ़लतापूर्वक चलि रहल अछि। दर्शक केर नीक “ रिस्पॉन्स” भेट रहल अछि। दोसर दिस, दिल्लीक युवावृन्द केर सहयोगसं बनल “ छूटत नहिं प्रेमक रंग” जेकि 10 मई के फरीदाबाद के निलम टॉकीज मे  रिलीज भेल, दर्शकक मन-मस्तिष्क पर अपन रंग  देखाबयमें ततर देखाइ द रहल अछि। आब, मनोज झाक “ हमर सौतीन” रिलीज होमय जा रहल अछि।
प्रथम मैथिली फ़िल्म फ़ेस्टिवलक उपरान्त मैथिली सिनेमाके नव आयाम आ उड़ान भेटल अछि। घोषित फ़िल्मक वर्तमान सूची पाय्घ भेल जा रहल अछि। एहि सूचीमें लगभग दु दर्जन फ़िल्मक नाम लेल जा सकैत अछि जाहिमें- संस्कार,घटकैती, सेनुरक मोल बड्ड अनमोल, हीरो-तोहर दिवाना, रंगबाज छौड़ा, अछिंजल, घोघमें चान्द, हड़बड़ी बियाह कनपट्टी सेनुर, छोटकी कनिया बड़की कनिया, चैनपुरवाली, हमरो करा द बियाह, सौतीनक बेटी, रमौलीबाली, अहां सं लागल लगन, चारि धाम, मिथिला धाम, ईश्वर अल्लाह तोरो नाम आदि किछु नाम उल्लेखनीय अछि।

मैथिली सिनेमाक लेल  नेपालोमें बहुत रास महत्वपूर्ण काज  भेल अछि आ एखनो भ रहल अछि। 
निष्कर्षत: ई साबित भ रहल अछि जे मैथिली सिनेमाक भविष्य उज्ज्वल अछि। भोजपुरी सिनेमाक अश्लीलतासं दर्शकक मोनमें उचात आबि गेल अछि। एहि परिदॄष्यमें मैथिली सिनेमा एकटा नीक बाजार आ उद्योगक रुपमें उभड़त, कारण बहुत रास दर्शक, निर्माता,निर्देशक, अभिनेता आदि मैथिली सिनेमा दिस जल्दिये घुड़ताह, ई कहब कोनो अतिश्योक्ति नहिं।

मैथिली दर्पण केर दोसरका अंकमे अगस्त 2013मे प्रकाशित लेख।
 - भास्कर झा

Tuesday, August 9, 2011

मैथिली फिल्मक विकास यात्रा - अजित कुमार आजाद

31 मइ, 2009। मिथिलाक मानचित्रा पर एखन लगभग एक सय दस टा सिनेमा हॉल अछि। एहिमे ओहि बाँसवला सिनेमा हॉलक गनती नहि अछि जे हाल-फ़िलहालमे मिथिलाक विभिन्न गाम आ हाट-बजार आदिमे बनल अछि किन्तु आश्चर्य! एखन कोनो सिनेमाघरमे मैथिली फिल्मक नहि चलि रहल अछि। पछिला वर्ष अर्थात नवम्बर 2008मे मात्रा किछु दिनक लेल जयनगरक एकटा सिनेमा हॉलमे मनोज झा निर्देशित ‘सुहागिन’ जेना-तेना चलि सकल, सेहो प्रायः एही कारणे जे एहि फिल्मक निर्देशक जयनगरक बसिन्दा छथि। पाया पारक मिथिला अर्थात नेपालक मैथिली भाषी क्षेत्रामे सेहो सिनेमाघरक कमी नहि अछि किन्तु ओतहु हिन्दी अथवा नेपाली फिल्म छोड़ि कोनो मैथिली फिल्म नहि लागल अछि। तात्पर्य ई जे भारत आ नेपाल स्थित दुनू पारक मिथिलाक लगभग 200 सिनेमाघरमे पछिला वर्ष मात्रा एकटा फिल्म लागल आ जे सप्ताहो नहि पूरल कि उतरि गेल। एहि वर्ष एखनध्रि एकहुटा फिल्म रिलीज नहि भेल अछि।

मैथिली फिल्म उद्योग कतेक पानिमे अछि, ई उपरोक्त तथ्यसँ नीक जकाँ स्पष्ट भ’ जाइत अछि। एहि जरल पर नोन तखन आर छिंटा जाइत अछि जखन हमरा लोकनि ई जनैत छी जे मिथिलाक उक्त सिनेमाघर सभमे भोजपुरी फिल्म चारि-चारि सप्ताह धरि चारू शो ‘हाउसपुफल’ जाइत अछि। शंकर टॉकिज, मध्ुबनीमे ‘निरहुआ रिक्शावाला’ सिल्वर जुबली मनेबाक स्थितिमे छल। मनोज तिवारीक ‘ससुरा बड़ा पैसावाला’ सेहो मिथिलाक विभिन्न भागमे खूबे चलल। तात्पर्य ई जे रानी चटर्जी, रिंकू घोष, रवि किशन, दिनेशलाल यादव निरहुआ, मनोज तिवारी आदि कलाकार भोजपुरी भाषी क्षेत्राक तुलनामे मिथिलामे बेसी लोकप्रिय छथि त’ एकर मूल कारण यैह अछि जे हमरा लोकनिक सिनेमाघर हुनका सभक फिल्म लेल सदिखन अजबारल छनि। से किएक? एकर की कारण? मैथिली भाषा एवं संस्कृतिक प्रति हमरा लोकनिक निष्ठा कहीं अलोपित त’ नहि भ’ रहल अछि? आ कि एकर किछु आन कारण अछि?

वर्ष 1932 ई.मे भारतक पहिल सवाक् फिल्म ‘आलम आरा’क निर्माणक 32 वर्ष बाद शुरू भेल मैथिली फिल्मक इतिहास यद्यपि पैंतालीस वर्ष पुरान अछि किन्तु संकोचक संग ई मानहि पड़त जे मैथिली फिल्म उद्योग एखनहुँ धरि शैशवेवस्थामे अछि। ममता गाबय गीत, कन्यादान, भौजी मायजय बाबा बैजनाथ सन चारि गोट कसल कथा-पटकथा आ गीत-संगीत वला फिल्म सँ ‘स्टार्ट’ लेबय वला मैथिली फिल्मक उद्योग आइध्रि जँ अपन पैर पर ठाढ़ नहि भ’ सकल अछि त’ एकर अनेक कारण भ’ सकैछ। एहि आलेखमे हम पाठक लोकनिके ँ मैथिलीमे अद्यावध् िबनल फिल्म सभक मादे संक्षेपमे जनतब देबय चाहबनि।

वर्ष 1964 ई.मे महंथ मदन मोहन दास, उदयभानु सिंह आ केदारनाथ चौध्रीक संयुक्त प्रयाससँ मैथिली फिल्मक लेल पहिल बेर ‘लाइट, कैमरा, एक्शन’ शब्द गुँजल छल। ‘नैहर भेल मोर सासुर’ नामसँ शुरू भेल मैथिलीक एहि पहिल फिल्मक नाम बादमे कमल नाथ सिंह ठाकुरक कहला पर ‘ममता गाबय गीत’ राखल गेल। एहि फिल्मक प्रोड्यूसरमेसँ एक उपन्यासकार केदारनाथ चौध्रीक अनुसार ‘‘हम 19 सितम्बर, 1963 ई. के ँ कुल सैंतीस हजार टाका ल’ क’ मुम्बइ गेल रही। भोजपुरी फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़ैबो’, जे कि बिहारक पहिल फिल्म सेहो प्रमाणित भेल, क निर्माण आ मैथिली फिल्म ‘ममता गाबय गीत’क निर्माण मुम्बइमे लगभग एकहि संग शुरू भेल मुदा रिलीज भेल पहिने ‘गंगा मैया...’। मैथिलियोमे ममता गाबय गीतसँ पहिने ‘कन्यादान’ रिलीज भेल।’’

‘ममता गाबय गीत’ पिफल्मक किछु शूटिंग भेले छल कि कतिपय कारणसँ आगाँक काज ठमकि गेल। लगभग चौदह वर्ष धरि फिल्म निर्माण सम्बन्ध्ी सभटा काज ठमकल रहल। दोसर चरणमे काज जहिया शुरू भेल, निज ताहि दिन हिन्दी फिल्मक प्रख्यात् अभिनेत्राी नर्गिस दत्तक देहान्त भ’ गेलनि। एहि कारणसँ श्र(ांजलि स्वरूप ओहि दिनक शूटिंग स्थगित क’ देल गेल छल।। एहि बेर पिफल्म निर्माणक बीड़ा उठौने रहथि प्रसि( गीतकार-गायक जोड़ी रवीन्द्र-महेन्द्र आ तत्कालीन आयकर आयुक्त सीताराम झा। सीताराम झा ने सिपर्फ एहि पिफल्मक लेल आर्थिक मदद केलखिन बल्कि हिन्दी पिफल्मक प्रसि( निर्माता-निर्देशक जी.पी. सिप्पीसँ निर्माण सम्बन्ध्ी सहयोग दियेबामे सेहो महत्वपूर्ण भूूमिकाक निर्वाह कएलखिन। हिनका लोकनिक समवेत प्रयाससँ वर्ष 1981मे ई पिफल्म रिलीज भेल। दरभंगाक सोसाइटी सिनेमा हॉलमे ई पिफल्म लगभग डेढ़ महीना चलल जखन कि प्रभात टॉकिज,, कोलकतामे तीन महीना ध्रि हाउसपुफल रहल। रवीन्द्रनाथ ठाकुरक गीत आ श्याम शर्माक संगीतसँ सजल एहि पिफल्मक सभटा गीत खूबे लोकप्रिय भेल। सी. परमानन्द निर्देशित एहि पिफल्मक कैमरामैन रहथि सी. प्रसाद, कला निर्देशक रहथि ललित कुमुद आ शूटिंग प्रभारी रहथि विवेकानन्द झा। एहि पिफल्मक आउटडोर शूटिंग मुम्बइक मुलुन्ड आ कांदिवलीमे तथा इनडोर शूटिंग प्रसि( अभिनेता राजेन्द्र कुमारक डिम्पल स्टूडियो आ सुनील दत्तक अजन्ता स्टूडियोमे भेल छल। एहि पिफल्मक डबिंगमे प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’, सारिका एवं वैदेही ;दुनू रवीन्दनाथ ठाकुरक पुत्राीद्धक स्वर स्त्राी-पात्राक लेल कएल गेल छल। कलाकार लोकनिमे त्रिदीप कुमार, अजरा, प्यारे मोहन सहाय, प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’, राजेन्द्र झा, शरत चन्द्र मिश्र, आस नारायण मिश्र, प्रभा मिश्र, ललितेश, प्रेम कुमार मिश्र आदिक अभिनय प्रशंसित त’ खूबे भेल मुदा हिनका लोकनिक अभिनय अध्सिंख्य मैथिल नहि देखि सकलाह। एकर एकमात्रा कारण छल प्रिन्टक अभाव। पिफल्मक केवल एकटा प्रिन्ट उपलब्ध् छल जे बेराबेरी एक ठामसँ दोसर ठाम उपलब्ध् कराओल जाइत छल। हाँ, गीतक कैसेट अवश्य लोकसभ लग आसानीसँ पहुँचि गेल छल। मुहुर्त्तसँ रिलीज ध्रि एहि पिफल्मके ँ लगभग 14 वर्ष लागि गेलैक। एही अवध्मिे पफणी मजुमदार निर्देशित ‘कन्यादान’ ममता गाबय गीतसँ पहिने परदा पर उतरबामे बाजी मारि लेलक आ मैथिलीक पहिल प्रदर्शित पिफल्मक तगमा पाबि गेल।

प्रेमलता मिश्र ‘प्रेम’क अनुसार सभ कलाकार एक दिन निर्देशक सी. परमानन्दक आवास पर रूकलाह तथा दोसर दिनसँ हिनका लोकनिके ँ एकटा र्ध्मशालामे ठहराओल गेल। एहि पिफल्मक मादे एकटा विशेष बात ई जे शूटिंगक दौरान कलाकार लोकनि आपसमे मैथिलीमे गप करैत छलाह। एतेक ध्रि जे निर्देशक सेहो मैथिलीमे निर्देश देब’ लागल छलाह। आइ-काल्हि बनयबला मैथिली पिफल्म सभक क्रममे शूटिंग स्थल आदि पर मैथिली बजबामे कलाकार लोकिनके ँ संकोच होइत रहैत छनि। ई बात हमरा लोकनि मैथिली नाटकक रिहर्सल आदिक क्रममे सेहो देखि सकैत छी।

हरिमोहन झाक प्रसि( उपन्यास ‘कन्यादान’ पर आधरित कन्यादान पिफल्मक पटकथा-संवाद प्रसि( साहित्यकार पफणीश्वर नाथ ‘रेणु’ लिखलनि। कलाकार लोकनिमे रहथि तरुण बोस ;रेवती रमणद्ध, लता बोस ;बुच्ची दाइद्ध, चन्द्रनाथ मिश्र ‘अमर’ ;लाल ककाद्ध, ब्रज किशोर ;झारखंडी नाथद्ध, गीता मुखर्जी आदि। पिफल्मक निर्माता रहथि गया निवासी मुंशी प्रसाद। चर्चित कवि गोपालजी झा ‘गोपेश’क सेहो एहि पिफल्मक निर्माणमे महत्वपूर्ण योगदान छलनि। तेसर पिफल्म ‘भौजी माय’ मूलतः शरतचन्द्र चट्टोपाध्यायक प्रसि( बांग्ला कथा ‘रामेर सुमति’ पर आधरित एही नामसँ बनल बांग्ला पिफल्मक डबिंग छल। एकर भाषान्तरण प्रसि( कवि-कथाकार सोमदेव कयने रहथि। निर्देशक रहथि शान्तिलाल सोनी। उपरोक्त तीनू पिफल्ममे मैथिलीक साहित्यकार लोकनिक सहयोग स्पष्ट देखाइत अछि किन्तु आम जनताक सहयोग सेहो कम नहि रहल। चारिम पिफल्म ‘जय बाबा बैजनाथ’ तक अबैत-अबैत मिथिलामे मैथिली पिफल्मक लेल अपेक्षित वातावरणक निर्मिति भ’ गेल छल किन्तु अपफसोस जे हमरा लेाकनि एहि वातावरणके ँ दीर्घकाल ध्रि बनाक’ नहि राखि सकलहुँ। जँ से रहैत त’ एकर बाद बनल ‘मध्ुश्रावणी’, ‘ललका पाग’, ‘अमावस के चान’, ‘हमरा लग रहब’, ‘नाच-गान’ सहित दर्जन भरिसँ बेसी पिफल्म आइयो ध्रि डिब्बामे बन्द नहि रहितय।

उपरोक्त पिफल्मक ई नियति किएक भेलµ से प्रायः सभ पिफल्मक अलग-अलग खेड़हा अछि मुदा मुख्य बात मैथिलक आम बेमारी ‘गोलैसी’ अछि जकर शिकार मिथिलाक प्रायः अन्य सभ विध सेहो होइत रहल अछि। मैथिलीमे ने त’ कथा-पटकथाक अभाव अछि आ ने-गीतकार-संगीतकारक। मिथिलाक एकटा गायक उदितनारयण झा एखन देशक सर्वश्रेष्ठ गायक बनल छथि त’ निर्देशकक रूपमे प्रकाश झा, संजय झा, मनीष झाक लोहा सकल संसार मानि रहल अछि। ई बात त’ अन्यो भाषा-भाषी गछैत छथि जे कलाकारक मामिलामे मिथिलासँ बेसी सम्पन्न क्षेत्रा आन नहि अछि। लोकेशनक मामिलामे सेहो मिथिला अन्य कोनो भूखंडसँ दरिद्र नहि अछि। प्राकृतिक सुषमाक मामिला हो अथवा बाढ़ि-सुखाड़क दृश्य, मिथिलामे बारहोमास उपलब्ध् भेटत। हाँ, अबरजातक लेल रस्ता-बाट पर अवश्य प्रश्न उठाओल जा सकैत अछि।

अभिप्रायः ई जे हमरा लोकनि मैथिली पिफल्म उद्योगके ँ अद्यावध् िस्थापित क’ सकैत रही किन्तु अपन अहंमन्यता आ टंगघिच्चा-घिच्चीमे बिचहिमे लसकि गेल छी।

यद्यपि उपरोक्त सभ स्थिति-परिस्थितिक अछैत वर्ष 1999 अनेक तरहे ँ मीलक पाथर साबित भेल। बीसम शताब्दी जाइत-जाइत व्यवसायिक रूपसँ एकटा एहन सपफलतम मैथिली पिफल्म द’ गेल जे सभटा मिथ्या धरणा-अवधरणाके ँ स्वाहा करैत लैम्प-पोस्ट बनि गेल। मुरलीध्र निर्देशित बालकृष्ण झाक मामूली बजटक पिफल्म ‘सस्ता जिनगी महग सेनूर’ लोकप्रियताक सभ रिकॉर्ड ध्वस्त क’ देलक। ललितेश, रीना, रूबी अरुण अभिनीत ई पिफल्म चारि करोड़सँ बेसी रुपया कमौलक। यद्यपि एहि सपफलताके ँ सेहो हमरा लोकनि आगाँ भजा नहि सकलहुँ तथापि 2000 ई.मे प्रदर्शित पिफल्म ‘आउ पिया हमर नगरी’ घाटामे नहि रहल। कहल जाइत अछि जे एकर निर्देशक रहथि मुरलीध्र मुदा बादमे एकर निर्माता मणिकान्त मिश्र निर्देशकक रूपमे अपन नाम जोड़ि लेलनि। उक्त दुनू पिफल्मक शूटिंग मिथिलेमे भेल छल आ परदा पर भव्यतामे कोनहु कोनसँ कम नहि बुझना गेल।

2001मे दू टा वीडियो पिफल्म बनल आ व्यवसायिक दृष्टिकोणसँ दुनू असपफल रहल। गोपाल पाठक निर्देशित ‘ममता’ जतय रमेश रंजन, प्रवेश मल्लिक, संजीव आदिक अभिनयक बले ँ कहुना एक सप्ताह ध्रि चलि सकल ओतहि राजीव गौतम निर्देशित ‘सपना भेल सोहाग’ एतबो दिन नहि खेप सकल। वीडियो पिफल्म निर्माण यद्यपि अन्य माध्यमक अपेक्षा सस्ता छैक किन्तु मिथिलामे वीडियो हॉलक अनुपलब्ध्ता आ एहि तरहक पिफल्मक लेल अपेक्षित मानसक अभाव छैक। उक्त दुनू वीडियो पिफल्मक असपफलताक एकटा कारण एकर कमजोर पिफल्मांकन आ प्रचार-प्रसारमे अभाव सेहो छल।

वर्ष 2004मे निर्माता बालकृष्ण झा अपन दोसर पिफल्म ‘सेनूरक लाज’ ल’ क’ अपन पहिल पिफल्म ‘सस्ता जिनगी महग सेनूर’क सपफलताके ँ दोहराब’ चाहलनि किन्तु ई राजकमल चौध्रीक चर्चित कथा ‘ललका पाग’क पैरोडी संस्करण प्रमाणित भ’ क’ रहि गेल। निर्देशक विनीत यादव एहि पिफल्मके ँ कोनो कोनसँ नहि सम्हारि सकलाह। समुचित प्रकाशक अभावसँ पिफल्म बहुत सापफ नहि देखाइत अछि। महिला दर्शकके ँ रिझेबामे यद्यपि ई पिफल्म सपफल रहल किन्तु अपन घाटाके ँ नहि पाटि सकल।

2005मे आयल ‘कखन हरब दुख मोर’क प्रचार-प्रसारमे कमी नहि कएल गेल किन्तु सिनेमा घरक टिकट खिड़की पर भीड़ नहि जुटि सकल। निर्माता संजय राय आ निर्देशक संतोष बादलके ँ बादमे टी. सीरीजक सहयोगसँ बजारमे एहि पिफल्मक सीडी उतार’ पड़लनि जकर रिकार्ड-तोड़ बिक्री भेल। एही वर्ष निर्देशक अभिजीत सिंहक ‘दुलरूआ बाबू’ सेहो प्रदर्शित भेल किन्तु कमजोर पटकथाक कारणे असपफल भ’ गेल।

वर्ष 2006मे पेफर दू टा वीडियो पिफल्म बनल आ दुनू मुहें भरे खसल। मनोज झा निर्देशित ‘गरीबक बेटी’ आ गोपाल पाठक निर्देशित ‘अहाँ छी हमरा लेल’ सपफलताक कोनो नव अध्याय नहि लिखि सकल। कहि सकैत छी जे असपफलता आइधरि मैथिली पिफल्मक सपफलताके ँ गछारने अछि। हाँ, ‘गरीबक बेटी’मे अनिल मिश्राक अभिनय प्रभावकारी छल।

2007मे सुहागिनक निर्माण आरम्भ भेल जकरा मादे हम पहिनहि कहि चुकल छी जे ई पिफल्म एक सालक निर्माण-यात्राक बाद नवम्बर 2008मे सिनेमाहॉलसँ किछुए दिनमे उतरि गेल।

वर्ष 2008मे निर्माणाध्ीन पिफल्मक श्रेणीमे चारि टा पिफल्म छल जाहिमे एक चुटकी सिन्दूर, काजर, किसलय कृष्णक निर्देशनमे बनय जा रहल ‘हम्मर अप्पन गाम अप्पन लोक’ आ सूरज तिवारी निर्देशित ‘पिया संग प्रीत कोना हम करबै’ शामिल अछि। जनतबक अनुसार, अजित कुमार आजादक पटकथा पर बनय जा रहल ‘हमर अप्पन गाम अप्पन लोक’ वर्ष 2009 मे इन्द्रपूजाक अवसर पर रिलीज कएल जायत जखन कि प्रोड्यूसर जितेन्द्र झाक ‘पिया संग प्रीत कोना हम करबै’ दुर्गापूजामे। एखन धरि त’ कोनो एक वर्षमे चारिटा मैथिली पिफल्म एक संगे नहिये रिलीज भेल अछि। ओना, पहिनेक तुलनामे स्थिति बदललैक अछि। देखा-चाही जे एहि बदलल स्थितिक लाभ पिफल्म निर्माणसँ जुड़ल लोकसभ कोन तरहे ँ उठा पबैत छथि। मिथिलाक दर्शक आब मैथिलीमे नीक पिफल्म देखय चाहैत छथि तकर अनुमान कैसेट-सीडीक बिक्रीसँ त’ लगाओले जा सकैत अछि।

मिथिला दर्शन, कोलकाता मे 2009 प्रकाशितद्ध सम्पर्क: 21, एम.आइ.जी., हनुमान नगर पटना-20, मो.-09234942661

Sunday, July 24, 2011

History Of Maithili Films: A Bird’s Eye View

History Of Maithili Films: A Bird’s Eye View

Of all the languages of India Maithili is considered to be the sweetest and most cultured. It is needless to point out that Maithili is spoken by about 6 -7 crores of the people of not only India but abroad also. The most significant characteristic feature of this sweet language is that it has its own grammar ,literature, culture ,customs, almanac and geographical area .Maithili language is known all over the world for its sweetness, classical epics, melodious songs of Poet Vidyapati and what not. In the light of all this riches possessed by Maithili that it has been accorded a place in the Constitution of India.

Cinema is supposed to be the vehicle of expression of literature of a language. Seeing the importance and popularity of the cinema, it has become a literary form. It is in a way a visual literature compact in itself.

As far as Maithili cinema is considered, it has remained till date at back foot which is a matter of utter shame and serious concern for all the Maithils. However, some people have tried their best to heip Maithili cinema get its due. Let us delve deep into the history and milestones whatever of Maithili Cinema.

It is a common knowledge that the first Maithili movie was Kanyadan (released in 1965 & Directed by Phani Majumdar), of which a significant portion was made in the Maithili language. The film's story in which the protagonist doesn’t know maithili language but decided to learn maithili as his wife knows only maithili language. It is based on the novel KANYADAAN by Harimohan Jha.

Another maithili movie "Mamta Gaave Geet" was released in possibly 1984-85 and became very popular due to the melodious songs and good storyline. It is a matter of privilege that famous singers Geeta Dutta and Suman Kalyanpur, Mahendra Kapoor had given their voice to the songs.

But after that no serious effort was done to make Maithil films. Although twi films Bhauji May (dubbed from Gujrati) and Jai Baba Baijnath also felt their presence.

Nevertheless, Anand Mishra tried to revive it with his tele film “ Ijot” which depicts the hard reality of the youths of Mithilanchal.But unfortunately this films remained incomplete and could not be released. In this film Udit Narayan also gave his voice. It is to be noted that even before “ Ijot”, Anand Mishra also had come with a Maithili video “ Ena Katay Din”.

Then came yet another superhit film “Sasta Jinagai Mahag Sinur”, released in 1999, which went a long way in revival of Maithili film Industries. Muarli Dhar, a great Director, Music composer, Singer, actor has directed this film. Moreover, Balkrishna Jha’s contribution in this film can also not be ruled out. All the songs of this movie sung by Md Aziz, Sadhana Sargam and Udit Narayan, Deepa Narayan became super hit and very popular thus breaking all success records. This maithili film's songs are still played in many village fairs and other Maithil gatherings.

Another Maithili film" KAKHAN HARB DUKH MOR" based on life of great Maithil Poet Vidyapati proved yet another milestone in the history of Maithili Cinema with all its success and response from the audiences. Thanks to excellent performance by actor Phool Singh who played the role of Vidyapati and great music and soulful songs by Gyaneshwar Dubey the film became a huge hit.

SENURAK LAAJ and DULARUA BABU are another great Maithili films which need to be viewed by one and all. Details of these films will be given in due course.

Aau Piya Hamar Nagari presented by Ashu-Priya Production was released in 2000.Unfortunately the movie couldnot get success as expected inspite of brilliant plot and narrative technique. 90% of the picturisation of this film was executed in the direction of popular Director Murli Dhar. Dr Manikant Mishra had later declared himself the Director of the film due to a small strife.

In 2007 November another Maithili film "Sindurdan" was released but the film was quickly withdrawn from theatres due to some sound problem.

The feature film, Senuriya ,directed by B.D. Prasad Chaudhary, music by Gyaneshwar Dubey, is a two-and-a-half hour film, made by Ayushman Films. Surya and Diva Shree play the lead role as actors with Rami Reddy in a negative role. In fact, it is a film dubbed from Tamil into Maithili.

Ek Chutki Sindur is presently in the lab and likely to be released shortly .

Sajana Ke Angan Men Solaho Shringar and Piya Bhel Pardesi are the two important Maithili films which are in the pipeline. The former is scheduled to be released during Durga Puja. Rahul Sinha ,rakhi Tripathi and Murli Dhar are the important stars in the film.


TO CONTINUE..........